कोरोना को लेकर हुआ बड़ा खुलासा: 80% मरीज दूसरों को नहीं करते संक्रमित

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नई दिल्ली: खतरनाक कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण की शुरुआत से ही वैज्ञानिकों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) द्वारा कई बड़े-बड़े दावे किए गए हैं. इस दौरान वैज्ञानिकों ने कई पहलुओं पर रिसर्च करने के बाद लोगों को सतर्क किया है. एक ऐसा ही रिसर्च अमेरिका (America) में भी हुई है. जिसके अनुसार वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि जानलेवा कोरोना वायरस से संक्रमित 80 प्रतिशत मरीज संपर्क में आए दूसरे लोगों को संक्रमित नहीं करते हैं. शोध के अनुसार, सिर्फ 20 प्रतिशत मरीज ही कोरोना के ‘सुपर स्प्रेडर‘ होते हैं. 

अमेरिका के फ्रेड हचिंसन कैंसर रिसर्च सेंटर (Fred Hutchinson Cancer Research Center) में हुए एक शुरुआती अध्ययन में पाया गया है कि COVID-19 आमतौर पर ‘सुपर-स्प्रेडर घटनाओं’ के माध्यम से फैलता है और ऐसे कोरोना से संक्रमित लोगों में से केवल 20 प्रतिशत मरीज ही आगे दूसरों को संक्रमित करते हैं. रिसर्च टीम के मुख्य वैज्ञानिक शिफर, फ्रेड हच पोस्टडॉक्टोरल, आशीष गोयल और ब्रायन मेयर ने बताया कि हमनें इस वायरस के व्यवहार की तुलना फ्लू से करने के लिए एक कंप्यूटर मॉडल का उपयोग किया. 

इसमें पाया गया कि COVID-19 तब सबसे ज्यादा फैलता है जब आमतौर पर कोई व्यक्ति जो ‘पूरी तरह’ (सिम्पटम्स के साथ) संक्रमित होता है और वह ”गलत जगह, गलत समय पर” होता है. शोध में कहा गया कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज कई हफ्तों तक वायरस को बेहद कम ही फैलाते हैं, वो दो दिनों में मुश्किल से एक व्यक्ति को ही संक्रमित कर सकते हैं. 

कोई कब कहलाता है ‘सुपर स्प्रेडर’ –
सुपर-स्प्रेडर्स तब होता है जब कोई संक्रमित व्यक्ति अपने ‘पीक कॉन्टैगियस पॉइंट’ पर होता है और लोगों के बीच में उठना बैठना कर रहा होता है. इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि अक्सर परिवार का एक व्यक्ति संक्रमित होता है पर बाकी सदस्य नहीं होते हैं. इसका मतलब है कि जो व्यक्ति पॉजिटिव था वो अपने ‘पीक कॉन्टैगियस पॉइंट’ पर नहीं था.

बताते चलें कि शोधकर्ताओं ने इसके संभावित तरीकों के आधे मिलियन से अधिक कंप्यूटर सिमुलेशन चलाए और उसके अनुसार उन्होंने इसके बाद वास्तविक डेटा की तुलना की जिसमें वायरस कैसे स्थानांतरित होता है इसका पता लगाया गया. इस प्रयोग से ये साफ हो गया कि COVID-19 से संक्रमित लोग “आमतौर पर दो दिनों से भी कम समय के लिए संक्रामक होते हैं. 

हालांकि ये रिसर्च अभी कोई भी चीज का पुर्णतः दावा नहीं कर रही, पर डिजिटल सिमुलेशन के बाद ये बहुत चीजों को साफ करती नजर आ रही है जो हमें कोरोना काल में देखने को मिल रही है. इसमे यह भी बताया गया है कि जब संक्रमित व्यक्ति लोगों की भीड़ में होता है और उसे लक्षण है तो वो और भी हानिकारक हो सकता है यदि संक्रमित व्यक्ति मास्क के बिना लोगों के अंदर या आसपास है!

जानकारों की मानें तो ऐसे समय में एक व्यक्ति के रूप में नैतिक बात यह है कि आपको इस धारणा के साथ घूमना है कि आप संक्रमित और संक्रामक हैं, जनता की सुरक्षा करना आपकी जिम्मेदारी है और किसी भी हालत में यह बिल्कुल नहीं बदलता है. इसलिए हमेशा मास्क और सामाजिक दूरी को बनाए रखना कोरोना काल में बेहद जरूरी है.

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