गंध न आने के तरीके से पहचानें COVID-19 है या आम फ्लू, जानिए क्या बता रहे वैज्ञानिक

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नई दिल्‍ली: COVID-19 का एक लक्षण यह भी है कि इसमें रोगी की गंध लेने (Smell Loss) की क्षमता खत्‍म हो जाती है. वैसे आम सर्दी-जुकाम होने पर नाक बंद होने के कारण भी कई बार व्‍यक्ति को किसी भी चीज की स्‍मेल नहीं आती है. ऐसे में लोग गंध न आने पर इसके पीछे के कारण को लेकर भ्रमित हो सकते हैं. हाल ही में हुए नए शोध से पता चला है कि इन दोनों बीमारियों में गंध न आने में अंतर होता है और लोग इसके बीच का फर्क कर सकते हैं. 

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यूरोपीय समूह के गंध विकार विशेषज्ञों और प्रोफेसर फिलपॉट ने मिलकर पूर्वी एंग्लिया विश्वविद्यालय में एक शोध किया था. Rhinology जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में बताया गया है कि COVID -19 रोगियों में गंध और स्वाद विकार अन्‍य रेस्‍परेटरी इंफेक्‍शन के कारण होने वाले विकारों से कैसे अलग है. 

यह हैं अंतर 
मुख्य अंतर यह है कि COVID-19 रोगी को भले ही गंध न आए लेकिन वह आराम से सांस ले सकता है, जबकि आम फ्लू में व्‍यक्ति की नाक भी बंद हो जाती है. वहीं कोविड-19 रोगी कड़वे और मीठे में भी फर्क नहीं बता पाता. ये निष्कर्ष उस सिद्धांत को साबित करते हैं कि COVID -19 मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को संक्रमित करता है. लिहाजा शोध टीम को उम्मीद है कि उनकी यह रिसर्च प्राइमरी केयर और इमरजेंसी में COVID-19 की स्क्रीनिंग के दौरान मददगार साबित हो सकती है.

UEA के नॉर्विच मेडिकल स्कूल के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर कार्ल फिलपॉट ने कहा, ‘गंध और स्वाद न आना COVID-19 का एक प्रमुख लक्षण है. हालांकि, यह सर्दी होने का भी एक सामान्य लक्षण है. हम जानना चाहते थे कि इन दोनों स्थितियों में गंध में क्‍या फर्क है.’ शोध टीम ने 10 कोविड ​​-19 रोगियों, 10 जुकाम से बुरी तरह ग्रस्‍त लोगों और 10 स्‍वस्‍थ लोगों पर गंध और स्‍वाद को लेकर यह अध्‍ययन किया. 

प्रोफेसर ने आगे कहा, ‘यह बहुत रोमांचक है क्योंकि इसका मतलब है कि कोविद -19 रोगियों और नियमित सर्दी या फ्लू वाले लोगों के बीच अंतर करने के लिए गंध और स्वाद परीक्षण का उपयोग किया जा सकता है.’ हालांकि इस तरह के परीक्षण औपचारिक डायग्‍नोस्टिक टेक्‍नीक का विकल्‍प नहीं हो सकते लेकिन यह तेजी से जांच करने के दौरान उपयोगी साबित हो सकते हैं. जैसे प्राइमरी केयर या हवाई अड्डे जैसी जगहों पर. 

उन्‍होंने कहा, ‘ स्‍वाद को लेकर आगे और शोध करने की जरूरत है क्‍योंकि यह जानना होगा कि क्या लोगों के कड़वे और मीठे स्वाद के रिसेप्टर्स में आनुवंशिक भिन्नता से COVID -19 रोगी में प्रभाव दिखता है या क्‍या COVID -19 संक्रमण इन रिसेप्टर्स के कार्य को बदलता है.’ 

 




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