महिलाओं में रात के समय जानलेवा Cardiac Arrest का खतरा अधिक, हार्ट को हेल्दी रखने के लिए ये टिप्स अपनाएं

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नई दिल्ली: एक नई स्टडी में यह बात सामने आयी है कि रात के समय में अचानक कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) आने और इसकी वजह से मौत का खतरा पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक होता है. इस स्टडी के नतीजों को हार्ट रिदम (Heart Rhythm) नाम के जर्नल में प्रकाशित किया गया है. इस स्टडी को अमेरिका के लॉस एंजेलिस स्थित Smidt हार्ट इंस्टिट्यूट के सेंटर फॉर कार्डियक अरेस्ट प्रिवेंशन की ओर से किया गया था जिसमें पहली बार यह बात सामने आयी कि रात के समय (Night time) पुरुषों की तुलना में महिलाओं को कार्डियक अरेस्ट होने का खतरा अधिक है.

कार्डियक अरेस्ट में हार्ट धड़कना बंद कर देता है

मेडिकल एक्सपर्ट्स इस बात को लेकर हैरान परेशान हैं क्योंकि देर रात में जब ज्यादातर मरीज आराम कर रहे होते हैं उस दौरान उनका मेटाबॉलिज्म (Metabolism), हार्ट रेट (Heart Rate) और ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) सबकुछ कम होता है. सडन कार्डियक अरेस्ट, हार्ट के रिदम यानी लय में अचानक होने वाला एक तरह की इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी है जिसकी वजह से हार्ट धड़कना बंद कर देता है. अक्सर लोग कार्डियक अरेस्ट को हार्ट अटैक (Heart Attack) समझकर कन्फ्यूज हो जाते हैं. 

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हार्ट अटैक से अलग है कार्डियक अरेस्ट

लेकिन हार्ट अटैक कोरोनरी धमनियों (Coronary Arteries) में कोलेस्ट्रॉल प्लाक के जमने के कारण होने वाले ब्लॉकेज के कारण होता है और हार्ट अटैक के दौरान मरीज में कई तरह के लक्षण नजर आते हैं. लेकिन सडन कार्डियक अरेस्ट अचानक होता है और इसमें चेतावनी वाले कोई संकेत (Warning Signs) नहीं मिलते. यही कारण है कि जहां हार्ट अटैक के अधिकतर मरीज बच जाते हैं वहीं कार्डियक अरेस्ट के 10 प्रतिशत मरीजों की भी जान नहीं बच पाती. आपको जानकरी हैरानी कि कार्डियक अरेस्ट के 17 से 41 प्रतिशत मामले रात के 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच होते हैं.

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ऐसे रखें हार्ट को हेल्दी

– स्मोकिंग न करें. हृदय से संबंधित बीमारियां होने का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान (Smoking) है. अल्कोहल (Alcohol) का सेवन भी कम से कम करें.
– ऐक्टिव लाइफस्टाइल अपनाएं. हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें.
– अपना वेट मैनेज करें. अगर आपका वजन अधिक है तो हृदय रोग का खतरा भी अधिक होगा इसलिए वेट लॉस करें.
– अपनी रोजाना की डाइट में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं और सैचुरेटेड फैट से जुड़ी चीजें कम से कम खाएं.
– रोजाना की डाइट में ताजे और मौसमी फल और सब्जियों को जरूर शामिल करें.
– नमक का सेवन कम से कम करें. 
– हफ्ते में कम से कम 2 बार मछली खाएं. सैल्मन और सार्डिन जैसी ओमेगा-3 फैट से भरपूर मछली को डाइट में शामिल करें.

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